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View compareविडंबना ही है कि डा आंबेडकर के व्यक्तितत्व और कृतित्व को न तो उनको पक्षधर पूरी जानते है और न ही आलोचक। सालों से यही बताया जा रहा कि उनकी भारतीय संविधान निर्माण में मुख्य भूमिका ही थी और वह केवल दलित सुधारक ही थे। जबकि उनके मूल अधिकृत ग्रंथ पढ़ने से पता चलता है कि उनकी सोच बहुत व्यापक और राष्ट्रभक्ति वाली थी। उन्होंने भारत में व्याप्त लगभग सभी बड़ी तत्कालीन और भविष्य की समस्याओं पर प्रकाश डाला और समाधान प्रस्तुत किया। संस्कृत भाषा का समर्थन, भगवा ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाये जाने का समर्थन का आश्वासन सहित, समान नागरिक संहिता, हिंदू सुधार अधिनियम में उनकी भूमिका, तिब्बत मसले पर चीन के मंसूबों पर भारत सरकार को आगाह करना। कई ऐसे राष्ट्रीय मुद्दे है जिन पर बाबा साहब के सुस्पष्ट देशहित में विचार दृष्टिगत होते है। चिरपरिचित पुरस्कृत लेखक मुनीश त्रिपाठी ने अपने कठोर अध्ययन द्वारा बाबा साहब के राष्ट्रीय विचारों को अपनी इस पुस्तक 'आंबेडकर, हिंदुत्व और भारत' में प्रमाणिक, शोधपरक और तथ्यपरक तरह से संकलित किया है। बाबा साहब के विचारों को समग्र रूप से जानने के लिए इस पुस्तक को पढ़ना अत्यंत जरुरी है। हिंदू समाज में फैल रही आपसी विषमता को दूर करने में यह पुस्तक सहायक होगी।

